झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की सरकारी जमीन से जुड़े चर्चित घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को निजी लोगों के नाम कराने की साजिश रची गई।

चार लोगों पर चार्जशीट

एसीबी ने इस मामले में राज किशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, चेतन कुमार और राजेश कुमार झा को आरोपी बनाया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, बड़ाईक बंधुओं ने सरकारी जमीन को अपनी निजी संपत्ति दिखाने के लिए फर्जी वंशावली और जाली दस्तावेज तैयार किए। वहीं, खूंटी निवासी चेतन कुमार पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल कर जमीन के अवैध हस्तांतरण में भूमिका निभाने का आरोप है।

राजेश कुमार झा पर कथित तौर पर जमीन की अवैध खरीद-बिक्री में बिचौलिए की भूमिका निभाने और भू-माफियाओं व बिल्डरों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये के लेन-देन का आरोप लगाया गया है।

100 करोड़ से अधिक की सरकारी जमीन का मामला

जांच के मुताबिक, यह मामला मोरहाबादी और कोकर मौजा की करीब 9.65 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसकी बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

कई धाराओं में केस दर्ज

एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है।

जांच अभी जारी

एसीबी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में अन्य अधिकारियों, अंचल कर्मियों, नगर निगम से जुड़े कर्मचारियों और बिल्डरों की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि साक्ष्य मिलने पर इस मामले में पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।