सुप्रीम कोर्ट ने हजारीबाग में डीसी रहते हुए सेवायत भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री मामले में जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को सशर्त जमानत दे दी है। यह फैसला सोमवार को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद सुनाया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें राहत प्रदान की, लेकिन इसके साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विनय चौबे देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेंगे और उन्हें केस से जुड़े किसी भी गवाह से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही उन्हें जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा। इन शर्तों का पालन करने पर ही उन्हें जेल से रिहा किया जाएगा।

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

यह पूरा मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच से जुड़ा है। एसीबी ने वर्ष 2025 में इस केस में प्राथमिकी दर्ज की थी और जांच के बाद चार्जशीट भी दाखिल की थी। आरोप है कि हजारीबाग में डीसी रहते हुए सेवायत भूमि की खरीद-बिक्री में अनियमितताएं की गईं।

इसी मामले में 20 मई 2025 को एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अब सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आ सकेंगे, लेकिन ट्रायल और जांच की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।