झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, JPSC, CBI और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल याचिका से जुड़ा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने CBI जांच या सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग रखी।
परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर उठे सवाल
याचिका में 19 अप्रैल 2026 को विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत आयोजित JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है।
OMR और CCTV समेत डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में परीक्षा से जुड़े भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इसमें मूल OMR शीट, अभ्यर्थियों के पास मौजूद OMR कार्बन कॉपी, CCTV फुटेज समेत अन्य रिकॉर्ड को संरक्षित रखने की मांग शामिल है, ताकि जांच के दौरान साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
छात्रों के आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
JPSC और राज्य की अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन लंबे समय तक चला है। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शीर्ष अदालत के नोटिस के बाद केंद्र, राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब पर आगे की सुनवाई निर्भर करेगी।
क्या CBI जांच का आदेश देगा सुप्रीम कोर्ट?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केवल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने अभी CBI जांच का आदेश नहीं दिया है। याचिका में CBI या स्वतंत्र जांच की मांग की गई है और आगे की सुनवाई में इस पर अदालत का रुख स्पष्ट होगा।