झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन अब एक नए विवाद में घिर गया है। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे से 2 बजे के बीच पुलिस और प्रशासन की टीम के धरनास्थल पहुंचने को लेकर भाजपा और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया है कि देर रात उपायुक्त (DC), SSP और सिटी SP समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारी दल-बल के साथ धरनास्थल पहुंचे और सो रहे छात्रों को हटाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की गई। वहीं पुलिस और जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि टीम किसी छात्र को हिरासत में लेने या जबरन हटाने नहीं गई थी।
भाजपा ने लगाया आंदोलन दबाने का आरोप
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी और भाजपा के अन्य नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने रात के अंधेरे में बल प्रयोग कर छात्रों के आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया। भाजपा का कहना है कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ बातचीत करने के बजाय प्रशासन दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
आंदोलनकारी छात्रों और कोर कमेटी का भी दावा है कि अधिकारियों ने देर रात धरनास्थल पहुंचकर भूख हड़ताल खत्म करने के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया।
पुलिस ने आरोपों को बताया गलत
रांची के सिटी SP पारस राणा और जिला प्रशासन ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, अधिकारियों की टीम छात्रों को हटाने या हिरासत में लेने के लिए नहीं पहुंची थी।
पुलिस का कहना है कि 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान हुई पत्थरबाजी और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए धरनास्थल पर मौजूद बाहरी एवं असामाजिक तत्वों की पहचान करने और सुरक्षा स्थिति की पुष्टि करने के लिए टीम रात में वहां पहुंची थी।
लाठीचार्ज के बाद और तेज हुआ आंदोलन
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन पिछले कई दिनों से जारी है। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इसके बाद लाठीचार्ज की घटना सामने आई।
इस कार्रवाई के विरोध में भाजपा ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया था। बंद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित हुआ।
CBI जांच और JSSC-CGL रद्द करने की मांग
आंदोलनकारी छात्र JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी से बढ़ा मामला
इस मामले में CID की जांच के बाद JPSC के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार इसे जांच में हुई कार्रवाई बता रही है, जबकि विपक्ष लगातार मामले की CBI जांच की मांग कर रहा है।
रात में पुलिस टीम के धरनास्थल पहुंचने की घटना के बाद छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। अब निगाहें सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं।