झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए JPSC और JSSC की 22 परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद 18 अगस्त की देर रात कार्मिक विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचना जारी की। यह फैसला CID और SIT की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है।

सरकार के फैसले से पहले से नियुक्त 2,628 अफसरों और कर्मचारियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। इनमें JSSC-CGL के 1,932 कर्मचारी, 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के 342 अधिकारी, SDPO के 63, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के 54 और महिला पर्यवेक्षिका के 237 पद शामिल हैं।

23 परीक्षाएं जांच के घेरे में

सरकार ने 2014 से आउटसोर्स एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) और JPSC से जुड़ी 23 अन्य परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में रखा है। इसके अलावा आगामी छह नियुक्ति परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए JPSC और JSSC में इंटरनल विजिलेंस सेल बनाने का फैसला लिया गया है। वहीं, परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित समिति को दो महीने में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। सरकार भर्ती गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का अनुरोध भी करेगी।

छात्रों का आंदोलन खत्म, चयनित अभ्यर्थियों का विरोध शुरू

परीक्षा रद्द करने के फैसले का आंदोलन कर रहे छात्रों ने स्वागत किया है। करीब 26 दिनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। हालांकि दूसरी ओर, पहले से नौकरी पा चुके करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थी फैसले के विरोध में सड़क पर उतर आए हैं।

इन अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की है। उनका तर्क है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।

अब इस फैसले के बाद एक तरफ परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी और उनके संभावित कानूनी कदम इस पूरे मामले को नया मोड़ दे सकते हैं।