झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद चयनित होकर नौकरी कर रहे कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर कर्मचारी लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या नव-नियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों (ASO) की है।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा पास की और निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्ति हासिल की। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द किए जाने से उनकी नौकरी और भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।

सरकार को दिया अल्टीमेटम

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा है कि जब तक परीक्षा रद्द करने से जुड़ी अधिसूचना वापस नहीं ली जाती, तब तक वे प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना जारी रखेंगे। उनका कहना है कि करीब 1,975 कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है।

सचिवालय में प्रवेश को लेकर हंगामा

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों को प्रोजेक्ट भवन के अंदर जाने से सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई।

बोले- गड़बड़ी हुई तो CBI जांच कराएं

कर्मचारियों ने सरकार से परीक्षा में कथित गड़बड़ी की CBI जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन इसका खामियाजा उन अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा पास की है।

कोर्ट जाने की तैयारी

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उनकी नियुक्तियां न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों के आदेशों के बाद हुई हैं। इसलिए परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ वे हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।

सरकार ने क्यों रद्द की परीक्षा?

राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के आंदोलन के बाद JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुधार समिति का गठन किया गया है।

JSSC-CGL को लेकर अब झारखंड में दो पक्ष आमने-सामने हैं—एक ओर परीक्षा रद्द कराने की मांग कर रहे छात्र हैं, तो दूसरी ओर नौकरी गंवाने के डर से चयनित कर्मचारी सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं।