एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। टीम में शामिल कीर्ति शर्मा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई। कीर्ति भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) प्रशिक्षण केंद्र, पदमा, हजारीबाग से जुड़ी हैं।

अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम अनिल मोहोड की भारतीय टीम ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को हराकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। यह एशियन गेम्स में भारत का इस स्पर्धा में पहला स्वर्ण पदक है।

कोरिया को हराकर भारत ने रचा इतिहास

भारतीय महिला टीम ने फाइनल में मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को शिकस्त दी। इस जीत के साथ भारत ने पहली बार एशियन गेम्स की महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस जीत ने दक्षिण कोरिया के लंबे वर्चस्व को भी समाप्त किया।

कीर्ति के स्वर्ण पदक जीतने की खबर से एसटीसी पदमा और हजारीबाग में खुशी का माहौल है। प्रशिक्षण केंद्र के प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों ने उनकी उपलब्धि पर बधाई दी है।

पिता के मार्गदर्शन में शुरू किया तीरंदाजी का सफर

बताया गया है कि कीर्ति के पिता उद्धम सिंह एसटीसी पदमा में कोच के रूप में कार्यरत हैं। कीर्ति ने 13 जून 2022 को अपने पिता के मार्गदर्शन में भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र, पदमा में प्रवेश लिया था। नियमित अभ्यास, अनुशासन और प्रशिक्षण के जरिए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई।

कीर्ति मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली हैं। उनके खेल सफर में उनके पिता के साथ एसटीसी पदमा के अन्य प्रशिक्षकों का भी योगदान रहा है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन

कीर्ति ने इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। उनके खाते में राष्ट्रीय स्तर पर टीम पदक के अलावा ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में पदक और एशिया कप तथा वर्ल्ड कप प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अनुभव है।

वर्ष 2026 में भी कीर्ति ने 2nd NTPC National Ranking Archery Tournament में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके बाद स्पेन में आयोजित वर्ल्ड कप स्टेज-4 में उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया और 668 अंक का स्कोर बनाया।

कीर्ति ने सफलता का श्रेय पिता और प्रशिक्षकों को दिया

स्वर्ण पदक जीतने के बाद कीर्ति ने अपनी उपलब्धि देश को समर्पित करते हुए कहा कि यह सफलता उनके पिता एवं एसटीसी पदमा के प्रभारी सह कोच उद्धम सिंह, प्रशिक्षण केंद्र में मिले वैज्ञानिक प्रशिक्षण, अनुशासन, नियमित अभ्यास और सभी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनकी यह सफलता केंद्र के दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।