बिहार-झारखंड के चर्चित चारा घोटाले के एक फरार आरोपी को सीबीआई की रांची टीम ने 25 साल बाद गिरफ्तार किया है। आरोपी सत्येंद्र कुमार को शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची लाया गया है। आरोपी के खिलाफ विशेष अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था और वर्ष 2001 में ही उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।

सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), रांची की टीम ने तड़के करीब 2:40 बजे यह कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, एजेंसी को गुप्त सूचना मिली थी कि सत्येंद्र कुमार मध्य प्रदेश के गुना से ट्रेन में सवार होकर उत्तर प्रदेश की ओर आ रहा है। उसके लखनऊ पहुंचने की सूचना मिलते ही सीबीआई की टीम चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंच गई। अधिकारी सादे कपड़ों में प्लेटफॉर्म पर तैनात थे। ट्रेन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर पहुंचते ही अधिकारियों ने आरोपी की पहचान की और उसे हिरासत में ले लिया।

इसके बाद चारबाग जीआरपी थाने में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। सीबीआई की ओर से जीआरपी थाना प्रभारी को भेजे गए पत्र में गिरफ्तारी की सूचना दी गई। बाद में आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रांची रवाना किया गया।

पशुपालन विभाग को 10 करोड़ रुपये से अधिक की दवा आपूर्ति का आरोप

आरोप है कि सत्येंद्र कुमार ने अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर कागजों पर दवा उत्पादन करने वाली कंपनी बनाई थी। उसके सहयोगी ने बीफार्मा की पढ़ाई की थी। आरोप के मुताबिक, इस कंपनी के माध्यम से बिहार सरकार के पशुपालन विभाग को करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की दवाओं की आपूर्ति दिखाई गई थी। जांच में आरोप है कि कागजों पर दवा की आपूर्ति दर्शाकर सरकारी खजाने से रकम निकाल ली गई।

इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भी चारा घोटाले से जुड़े कई मामलों में अदालत से सजा हो चुकी है। सत्येंद्र कुमार वर्ष 2001 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद से जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर था। अब करीब 25 साल बाद उसकी गिरफ्तारी को मामले की जांच में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।