झारखंड हाईकोर्ट ने कथित शराब घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने याचिका की मेंटेबिलिटी यानी सुनवाई योग्य होने पर आपत्ति जताते हुए इसे खारिज करने की मांग की। अदालत ने सरकार को मामले के तथ्यों और याचिका की सुनवाई योग्यता पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी।

बाबूलाल मरांडी ने दायर की है PIL

यह जनहित याचिका भाजपा के वरिष्ठ नेता और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कथित शराब घोटाले में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और निजी कंपनियों की भूमिका रही है। याचिकाकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे CBI को सौंपने की मांग की है।

सरकार ने याचिका की मेंटेबिलिटी पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार की ओर से याचिका की सुनवाई योग्यता पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई। सरकार ने अदालत से PIL को खारिज करने का आग्रह किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले के तथ्यों और याचिका की मेंटेबिलिटी के संबंध में विस्तृत पक्ष रखने का निर्देश दिया।

2022 की उत्पाद नीति को लेकर लगाए गए हैं आरोप

याचिका में वर्ष 2022 में झारखंड में लागू की गई नई उत्पाद नीति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर लागू की गई इस नीति के तहत फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर दो प्लेसमेंट एजेंसियों को काम दिया गया।

इसके अलावा शराब के होलसेल वितरण और होलोग्राम तैयार करने वाली कंपनियों से जुड़े मामलों में भी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

जांच की गति पर भी सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दावा किया गया है कि मामले में FIR दर्ज होने के करीब 14 महीने बाद भी राज्य की जांच एजेंसी की ओर से अंतिम चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। याचिका में जांच की गति को बेहद धीमा बताते हुए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है।

1 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

फिलहाल हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब 1 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार और याचिकाकर्ता की दलीलें सुनी जाएंगी। इसके बाद अदालत PIL की सुनवाई योग्यता और CBI जांच की मांग पर आगे निर्णय ले सकती है।