सोशल मीडिया और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश करते हुए राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा स्थित अपना घर आश्रम ने झारखंड के 5 साल से लापता मूक-बधिर युवक शरीफ अंसारी को उसके परिवार से मिलवा दिया। पिता और बेटे का यह भावुक मिलन सभी की आंखें नम कर गया।
बोल और सुन नहीं पाने से पहचान बन गई थी चुनौती
शरीफ अंसारी बोल और सुन नहीं सकते हैं। इसी कारण उनके परिवार और पहचान का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया था। लापता होने के बाद उन्हें नोखा के अपना घर आश्रम में आश्रय दिया गया, जहां कई वर्षों तक उनकी देखभाल की गई।
सोशल मीडिया से मिली परिवार तक पहुंच
आश्रम प्रबंधन ने शरीफ अंसारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। यह वीडियो झारखंड में रह रहे उनके पिता मंसूर मियां और चाचा तक पहुंचा। वीडियो देखकर उन्होंने तुरंत आश्रम से संपर्क किया। पहचान की पुष्टि होने के बाद परिवार राजस्थान पहुंचा और करीब 5 साल बाद पिता-पुत्र का भावुक मिलन हुआ।
‘घर वापसी अभियान’ बना उम्मीद की मिसाल
आश्रम के सचिव सतीश झंवर ने बताया कि संस्था का ‘घर वापसी अभियान’ लगातार चल रहा है, जिसका उद्देश्य बिछड़े, निराश्रित और असहाय लोगों को उनके परिवारों से मिलाना है। परिवार ने आश्रम की सेवा भावना की सराहना करते हुए इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया।