झारखंड को देश-दुनिया में केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है। नई दिल्ली में आयोजित ‘नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026’ में झारखंड के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य के पास प्राकृतिक सुंदरता का अनमोल खजाना है, जिसे वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकार झारखंड को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने के लिए नई नीतियां और योजनाएं लागू कर रही है।
जल्द आएगी नई होमस्टे नीति
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार जल्द ही आकर्षक होमस्टे नीति लागू करने जा रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़ना और गांव स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है। सरकार का लक्ष्य झारखंड को देश के अग्रणी होमस्टे गंतव्यों में शामिल करना है।
होमस्टे से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
सुदिव्य कुमार ने कहा कि जहां एक फाइव स्टार होटल से करीब 200 लोगों को रोजगार मिलता है, वहीं 100 होमस्टे विकसित होने पर 500 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिल सकता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
माइनिंग टूरिज्म की होगी शुरुआत
उन्होंने कहा कि झारखंड ने देश-विदेश के पर्यटकों के लिए अपने द्वार खोल दिए हैं। राज्य में पहली बार माइनिंग टूरिज्म की शुरुआत की जा रही है, जिससे पर्यटक खनन क्षेत्रों के इतिहास, तकनीक और विकास को करीब से जान सकेंगे। यह पहल झारखंड के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने का काम करेगी।
‘माइंस टू माइंड्स’ विजन पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य झारखंड को ‘माइंस टू माइंड्स’ की सोच के साथ आगे बढ़ाना है। इसी कड़ी में पर्यटन, उद्योग, आईटी समेत विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ₹86,000 करोड़ के 14 एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इन निवेशों से राज्य में रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।