झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के भौतिक सत्यापन अभियान में बड़ा खुलासा हुआ है। पूर्वी सिंहभूम जिले में सत्यापन के दौरान 6,700 लाभुक अपने दर्ज पते पर नहीं मिले हैं। प्रशासन ने ऐसे सभी संदिग्ध लाभार्थियों की सूची तैयार कर ली है और नियमों के तहत फिलहाल उनके खाते में जाने वाली राशि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
जिला प्रशासन द्वारा राज्य सरकार के निर्देश पर लाभार्थियों का घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। इस दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं, पंचायत सचिवों और वार्ड पार्षदों की टीम ने लाभुकों की पहचान और पात्रता की जांच की।
सत्यापन में सामने आईं कई गड़बड़ियां
जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें लाभार्थी अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। प्रशासन का मानना है कि इसके पीछे आवेदन भरते समय हुई त्रुटियां, गलत पता, डुप्लीकेट प्रविष्टियां और अपात्र व्यक्तियों का नाम सूची में शामिल होना प्रमुख कारण हो सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार कुछ लाभार्थी राज्य से बाहर चले गए हैं, जबकि कुछ मामलों में लाभुकों की मृत्यु होने के बावजूद नाम सूची में बने हुए हैं। ऐसे मामलों की भी अलग से जांच की जा रही है।
अपात्र लाभार्थियों की होगी छंटनी
सत्यापन अभियान का मुख्य उद्देश्य योजना में पारदर्शिता लाना और वास्तविक पात्र महिलाओं तक लाभ पहुंचाना है। इसके तहत मृत, अपात्र और सरकारी सेवा से जुड़े परिवारों की महिलाओं के नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
प्रशासन का कहना है कि सत्यापन पूरा होने के बाद अंतिम सूची तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
केवाईसी और आधार लिंक नहीं होने से भी अटका भुगतान
कई लाभार्थियों का भुगतान बैंक खातों की तकनीकी खामियों के कारण भी प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार जिन खातों का आधार से लिंक नहीं है या ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, उनके खाते में राशि हस्तांतरित नहीं हो पा रही है।
लाभार्थियों को क्या करना चाहिए?
प्रशासन ने योजना से जुड़ी महिलाओं से अपने दस्तावेज और बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखने की अपील की है। लाभार्थियों को आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच कराने की सलाह दी गई है।
यदि किसी पात्र महिला का नाम गलती से संदिग्ध सूची में शामिल हो गया है, तो वह अपने नजदीकी प्रखंड कार्यालय, प्रज्ञा केंद्र या संबंधित विभाग से संपर्क कर आवश्यक प्रमाण पत्र जमा कर सकती है।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम
अधिकारियों का कहना है कि इस सत्यापन अभियान का उद्देश्य किसी पात्र लाभार्थी को योजना से वंचित करना नहीं, बल्कि अपात्र और फर्जी लाभुकों की पहचान कर सरकारी राशि के दुरुपयोग को रोकना है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र महिलाओं को योजना का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहेगा।