नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद रांची के कोकर निवासी रामप्रसाद घोष (41) लापता हो गए हैं। रामप्रसाद नेपाल के अपर त्रिशूली क्षेत्र में एक हाइड्रो पावर परियोजना में एडमिनिस्ट्रेटर के पद पर कार्यरत थे। बाढ़ की घटना के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई है।
25 अगस्त को हुई थी आखिरी बातचीत
परिजनों के अनुसार, रामप्रसाद की परिवार से आखिरी बार 25 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया कॉल के जरिए बातचीत हुई थी। इसके अगले दिन नेपाल में बाढ़ की खबर सामने आने के बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। रामप्रसाद रांची के कोकर स्थित हैदर अली रोड, गली नंबर 12 के रहने वाले हैं।
रामप्रसाद एंड्रिट्ज हाइड्रो पावर कंपनी में एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि परियोजना स्थल पर भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब 200 अन्य कर्मचारी भी काम कर रहे थे।
भारतीय दूतावास से साझा की गई जानकारी
रामप्रसाद की तलाश और सुरक्षित वापसी के लिए झारखंड सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष की टीम लीडर शिखा लकड़ा के अनुसार, रामप्रसाद से जुड़ी पूरी जानकारी काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के साथ साझा की गई है।
राज्य सरकार ने नेपाल में भारतीय कांसुलर अधिकारियों के साथ-साथ कोलकाता स्थित नेपाल के महावाणिज्य दूतावास और प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स से भी संपर्क किया है। सरकार की ओर से नेपाल में फंसे या लापता झारखंड के नागरिकों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
75 वर्षीय पिता ने लगाई मदद की गुहार
रामप्रसाद के 75 वर्षीय पिता रंजीत कुमार घोष और उनके परिवार ने केंद्र तथा झारखंड सरकार से भावुक अपील की है। परिजनों की मांग है कि सरकार नेपाल प्रशासन और भारतीय दूतावास के साथ समन्वय कर रामप्रसाद की जल्द तलाश कराए और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था करे।
नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से बड़े पैमाने पर नुकसान की खबर है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद कई भारतीय पर्यटकों और श्रमिकों के फंसे होने की सूचना सामने आई है। ऐसे में रामप्रसाद के परिवार को अब सरकारी रेस्क्यू अभियान से उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद है।