झारखंड में वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है. रामगढ़ क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. वन एवं पर्यावरण विभाग ने रामगढ़ वन प्रमंडल क्षेत्र में आने वाली 81.1902 हेक्टेयर अधिसूचित वनभूमि पर निर्माण कार्य करने की अनुमति दे दी है. लंबे समय से इस भूमि पर काम शुरू करने के लिए वन विभाग की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा था. अब अनुमति मिलने के बाद इस क्षेत्र में निर्माण कार्य तेज हो सकेगा.

भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा एक्सप्रेस-वे

वाराणसी से कोलकाता तक बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना का हिस्सा है. झारखंड में इसका निर्माण चतरा जिले से किया जा रहा है. इस परियोजना के पूरा होने से वाराणसी और कोलकाता के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. साथ ही झारखंड के विभिन्न इलाकों में आवागमन और परिवहन व्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है.

पैकेज तीन के तहत बनेगा 46.500 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे

रामगढ़ क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे का निर्माण पैकेज तीन के तहत किया जाना है. इस पैकेज में कुल 46.500 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण प्रस्तावित है. इसके लिए रामगढ़ वन प्रमंडल क्षेत्र की 81.1902 हेक्टेयर अधिसूचित वनभूमि पर अनुमति जरूरी थी. वन एवं पर्यावरण विभाग की मंजूरी मिलने के बाद अब निर्माण एजेंसी को इस हिस्से में काम आगे बढ़ाने में सहूलियत होगी.

निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद

वनभूमि से जुड़ी अनुमति मिलने के बाद रामगढ़ क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे निर्माण की बाधा दूर होने की उम्मीद है. इससे परियोजना के निर्धारित हिस्से में काम को गति मिल सकती है. एक्सप्रेस-वे बनने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लंबी दूरी की यात्रा पहले से आसान होने की संभावना है.