झारखंड में स्कूलों में ड्रॉपआउट और अनामांकित बच्चों की पहचान के लिए चलाए जा रहे सर्वेक्षण में लापरवाही सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्ती की है। राज्य के 14 जिलों के 1,322 चिह्नित विद्यालयों में सर्वेक्षण अधूरा रहने के मामले में 2,526 शिक्षकों और प्रखंड स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने सर्वेक्षण कार्य में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए 56 प्रखंड स्तरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों, जिनमें बीईओ, बीईईओ और बीपीओ शामिल हैं, को शोकॉज नोटिस जारी किया है। वहीं, करीब 2,470 शिक्षकों का वेतन रोकने की चेतावनी दी गई है।
इन जिलों में सर्वेक्षण अधूरा
सर्वेक्षण का उद्देश्य 6 से 18 वर्ष तक के ड्रॉपआउट और अनामांकित बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण केंद्रों अथवा मुख्यधारा के विद्यालयों से जोड़ना है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक दुमका में 535, पलामू में 379, पाकुड़ में 140, देवघर में 57, गोड्डा में 51 और गिरिडीह में 45 स्कूलों में सर्वेक्षण अधूरा पाया गया। इसके अलावा लोहरदगा, साहिबगंज और गुमला में भी कई विद्यालयों में काम पूरा नहीं हुआ।
दुमका में सबसे अधिक शिक्षक प्रभावित
आंकड़ों के अनुसार दुमका में 1,027, पलामू में 722 और पाकुड़ में 278 शिक्षकों ने सर्वेक्षण का काम पूरा नहीं किया। विभाग ने संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य सर्वेक्षण को समय पर पूरा कराना और स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।