झारखंड में वर्ष 2026 के बाद प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर सियासत तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री Rameshwar Oraon ने चेतावनी दी है कि नई परिसीमन प्रक्रिया लागू होने पर राज्य में आदिवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या में भारी कमी आ सकती है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में झारखंड विधानसभा में आदिवासियों के लिए आरक्षित 28 सीटें घटकर 22 हो सकती हैं, जबकि लोकसभा में आरक्षित सीटों की संख्या 5 से घटकर 4 रह जाने की आशंका है। लगातार न्यूज से बातचीत में उरांव ने इसे आदिवासी समाज की राजनीतिक भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताया।

2026 के बाद खत्म होगी परिसीमन पर रोक

Rameshwar Oraon ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2007 में परिसीमन प्रक्रिया पर लगाई गई रोक 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। इसके बाद नई जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने वर्षों पहले परिवार नियोजन नीति का गंभीरता से पालन किया था, जिसके कारण Chaibasa, Dumka और Ranchi जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि दर नियंत्रित रही। अब उसी आधार पर सीटों की संख्या कम होना आदिवासी समाज के साथ अन्याय होगा।

दक्षिण भारत जैसे हालात की आशंका

उरांव ने कहा कि यह स्थिति दक्षिण भारत के उन राज्यों जैसी है, जहां परिवार नियोजन को सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों को भी परिसीमन के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटने की चिंता सता रही है।

उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2007 में भी परिसीमन के मुद्दे पर आदिवासी समाज ने बड़ा आंदोलन किया था। उस समय विभिन्न आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर अपनी चिंता जाहिर की थी। इसके बाद सर्वदलीय सहमति से परिसीमन प्रक्रिया पर 31 दिसंबर 2026 तक रोक लगाई गई थी।

मतदाता सूची पुनरीक्षण पर भी जताई चिंता

Rameshwar Oraon ने झारखंड में चल रही सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण जरूरी है, लेकिन यदि किसी समुदाय विशेष के वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी।

उन्होंने बताया कि पार्टी ने राज्यभर के बूथों पर बीएलए नियुक्त किए हैं, जो मतदाताओं के नामों की निगरानी करेंगे।

 

केंद्र सरकार से बड़ी मांग

उरांव ने केंद्र सरकार से मांग की कि परिसीमन प्रक्रिया पर वर्ष 2029 तक फिर से रोक लगाई जाए या फिर सीटों के निर्धारण में केवल जनसंख्या को आधार न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।