झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा JPSC और JSSC की परीक्षाओं व नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश से उन सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी नौकरी सरकार के फैसले के बाद संकट में पड़ गई थी।

नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर रोक

जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने सरकार की ओर से जारी नियुक्तियां रद्द करने वाले नोटिफिकेशन पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दोबारा अपने काम पर लौटने का निर्देश भी दिया है।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

सरकार ने क्यों रद्द की थीं परीक्षाएं?

छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बाद राज्य सरकार ने JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और JSSC-CGL समेत 22 भर्ती परीक्षाओं व उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया था।

सरकार का तर्क था कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों की जांच के आधार पर कार्रवाई जरूरी है।

अभ्यर्थियों ने फैसले को दी चुनौती

सरकार के फैसले के खिलाफ नौकरी पा चुके सौरभ सिंह, सोनम कुमारी, अवधेश कुमार और दीपमाला समेत कई अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का रुख किया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि बिना प्रत्येक अभ्यर्थी की व्यक्तिगत भूमिका की जांच किए पूरी परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका कहना था कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन निर्दोष और मेहनत से चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना उचित नहीं है।

अब आगे क्या?

हाई कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद फिलहाल नियुक्त अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि यह अंतिम फैसला नहीं है। राज्य सरकार को 15 दिनों में अपना जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

JPSC-JSSC विवाद में अब सरकार के फैसले, छात्रों की मांग और चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी—तीनों पर हाई कोर्ट की अगली सुनवाई अहम रहने वाली है।