झारखंड में हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति 2016 विवाद की जांच कर रहे फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन ने सरकार और Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) से सुप्रीम कोर्ट की रोक अवधि के दौरान हुई नियुक्तियों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। आयोग ने विषयवार और श्रेणीवार रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है ताकि मामले की गहन जांच की जा सके।
बताया गया कि Supreme Court of India ने 18 सितंबर 2019 से 2 अगस्त 2022 तक नियुक्तियों पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद इस अवधि में विभिन्न विषयों के लिए नियुक्ति संबंधी सिफारिशें की गईं और जिला स्तरीय मेरिट सूची के आधार पर अभ्यर्थियों की नियुक्तियां भी हुईं। इसी पहलू की जांच के लिए कमीशन ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
Justice Gautam Kumar Choudhary की अध्यक्षता वाले वन-मैन फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन के समक्ष हुई सुनवाई के बाद अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि आयोग ने वर्तमान में खाली पड़े पदों की संख्या भी विषयवार और श्रेणीवार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं से कहा गया है कि रिपोर्ट का अध्ययन कर यदि कोई आपत्ति हो तो उसे आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।
मामले से जुड़े अधिवक्ता ललित कुमार सिंह ने कहा कि नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों की जांच में समय लग रहा है। आयोग ने विशेष रूप से 18 सितंबर 2019 से 2 अगस्त 2022 के बीच हुई नियुक्तियों की संख्या और उनकी सिफारिश कब की गई, इसकी पूरी जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में आसानी होगी।
गौरतलब है कि JSSC ने वर्ष 2016 में हाई स्कूल शिक्षकों के 17,786 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। यह भर्ती प्रक्रिया शुरुआत से ही विवादों में रही है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हाई कोर्ट के निर्देश पर 26 विषयों के लिए राज्य स्तरीय मेरिट सूची और कट-ऑफ अंक जारी किए गए थे, जिसके आधार पर नियुक्तियां की गईं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली। इसी संबंध में मीना कुमारी समेत अन्य अभ्यर्थियों की ओर से कुल 258 याचिकाएं दायर की गई हैं। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तथ्यों की जांच के लिए वन-मैन फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन का गठन किया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जून को निर्धारित की गई है।