झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती घोटाले की जांच में पूर्व चेयरमैन और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। CID की जांच में आरोप सामने आया है कि गिरफ्तारी से पहले खियांग्ते ने JPSC कार्यालय में मौजूद परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा और दस्तावेजों को मिटाने की कोशिश की थी। जांच एजेंसी अब इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है।

कार्यालय से डिजिटल डेटा हटाने का आरोप

जांच के मुताबिक, खियांग्ते पर आरोप है कि उन्होंने JPSC कार्यालय से परीक्षा और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को हटाने का प्रयास किया। आशंका है कि इसका उद्देश्य जांच एजेंसी के हाथ महत्वपूर्ण सबूत लगने से रोकना था।

कंप्यूटर ऑपरेटर से मिला अहम सुराग

CID की जांच में JPSC के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है। जांच एजेंसी की पूछताछ में सामने आए बयानों के आधार पर कथित तौर पर डेटा से छेड़छाड़ और गोपनीय जानकारी से जुड़े कई सुराग मिले।

सरकारी आवास से दस्तावेज बरामद

CID ने खियांग्ते के रांची स्थित सरकारी आवास पर भी छापेमारी की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, वहां से JPSC से संबंधित कई महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज बरामद किए गए। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि ये दस्तावेज कार्यालय से उनके आवास तक कैसे पहुंचे।

कई दौर की पूछताछ के बाद गिरफ्तारी

पूर्व चेयरमैन से CID ने कई चरणों में लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसी ने उनके सामने डिजिटल साक्ष्यों, बरामद दस्तावेजों और अन्य आरोपियों से मिले बयानों से जुड़े सवाल रखे। इसके बाद उन्हें JPSC भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया गया।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को ठेका देने की जांच

मामले की जांच का एक प्रमुख बिंदु 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के आयोजन से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा कराने की जिम्मेदारी लखनऊ की TDPL नामक एजेंसी को दी गई थी, जिसे पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इसी फैसले और कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर CID जांच कर रही है।

मामले में करोड़ों रुपये के कथित लेनदेन की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के स्तर पर भी की जा रही है। CID की कार्रवाई के बाद भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी का मामला लगातार गहराता जा रहा है।