राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में वर्ष 2025 के MBBS नामांकन और टेंडर आवंटन से जुड़े कथित घोटाले की जांच तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Hemant Soren के निर्देश पर CID की दो विशेष टीमें संस्थान पहुंचकर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं। मामला मेडिकल सीटों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए नामांकन और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
प्रारंभिक जांच में यह आरोप सामने आया है कि करीब 12 छात्रों ने MBBS काउंसलिंग के दौरान फर्जी स्थानीय निवासी और जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर दाखिला प्राप्त किया। शिकायतों के आधार पर CID ने RIMS के डीन कार्यालय और डेटा सेंटर से एडमिशन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
RIMS प्रशासन के अनुसार, शिकायतों की जांच के बाद दो छात्रों का नामांकन पहले ही रद्द किया जा चुका है। इनके जाति प्रमाण पत्र सत्यापन में गलत पाए गए थे। वहीं अन्य संदिग्ध छात्रों के दस्तावेजों की जांच अभी जारी है।
दूसरी ओर CID की एक अलग टीम वर्ष 2025 में सफाई, सैनिटेशन और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े टेंडरों की भी जांच कर रही है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पात्रता मानकों की अनदेखी करते हुए कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
जांच में सामने आया है कि टेंडर शर्तों के अनुसार कंपनियों के पास कम से कम 500 बेड वाले अस्पताल में कार्य का अनुभव और न्यूनतम तीन करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर होना जरूरी था। इसके बावजूद कथित रूप से कुछ अयोग्य कंपनियों को तकनीकी और वित्तीय रूप से योग्य घोषित कर कार्य आवंटित कर दिया गया।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच केवल RIMS तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्य के अन्य सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में वर्ष 2025 के नामांकन की भी समीक्षा की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल CID दस्तावेजों की जांच और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ कर पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी हुई है।